Lohri 2026 Date: शादी के बाद है आपकी पहली लोहड़ी? भूलकर भी न करें ये गलतियां।
पंजाब और उत्तर भारत में लोहड़ी का त्यौहार केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह नए रिश्तों की मिठास और परिवार के साथ जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से शादी के बाद आने वाली पहली लोहड़ी नवविवाहित जोड़ों के लिए बहुत खास होती है। यह वह समय होता है जब नई बहू या दामाद को पूरे परिवार और समाज के सामने बड़े सम्मान के साथ अपनाया जाता है। इस दिन का उत्साह दोगुना हो जाता है, लेकिन कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है ताकि त्यौहार की रौनक बनी रहे।
इस खास अवसर पर पहनावे का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भारतीय परंपरा में शुभ अवसरों पर काले और सफेद जैसे फीके रंगों से परहेज किया जाता है। पहली लोहड़ी मना रहे जोड़ों को लाल, पीला, नारंगी या हरे जैसे चमकीले और खुशनुमा रंग पहनने चाहिए। महिलाएं पारंपरिक पंजाबी पोशाक जैसे भारी सूट या फुलकारी दुपट्टा पहनकर त्यौहार की शोभा बढ़ा सकती हैं, जबकि पुरुषों के लिए कुर्ता पजामा और जैकेट एक बेहतरीन पारंपरिक लुक देता है। सही पहनावा न केवल उत्सव की भावना को दर्शाता है बल्कि यादों को भी खास बनाता है।
लोहड़ी की सबसे प्रमुख परंपरा पवित्र अग्नि की पूजा करना है। इस अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली अर्पित की जाती है। यहाँ एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अग्नि में डाली जाने वाली सामग्री को पहले चखना नहीं चाहिए। उसे हमेशा अलग और पवित्र रखना चाहिए क्योंकि यह देवताओं को अर्पण की जाती है। खाते समय उसी बर्तन से सामग्री उठाकर अग्नि में डालना अशुभ माना जाता है। यह छोटी सी सावधानी आपके धार्मिक विश्वास और परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाती है।
अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करना सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शाम के समय जब अग्नि प्रज्वलित की जाती है, तो वह सबसे पवित्र समय होता है। नवविवाहित जोड़ों को उस समय पूजा और आहुति के लिए उपस्थित रहना चाहिए। इस दौरान परिवार के साथ मिलकर आने वाले सुखद जीवन की प्रार्थना की जाती है। साथ ही, बड़ों से मिलने वाले उपहारों को सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए। उपहार चाहे छोटा हो या बड़ा, उसमें अपनों का प्यार और आशीर्वाद छिपा होता है, जो रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाता है।
वर्ष 2026 में लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी, मंगलवार को मनाया जा रहा है। अग्नि प्रज्वलन का शुभ समय शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक रहेगा। यह त्यौहार न केवल नई शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और समृद्ध जीवन की कामना का भी माध्यम है। यदि घर में किसी नए बच्चे का जन्म हुआ है, तो उस बच्चे की भी पहली लोहड़ी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह त्यौहार परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ लाने और खुशियां बांटने का एक सुंदर जरिया है।